Jagran Sakhi

Women Liberation & Empowerment Blog

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Jagran Sakhi Blog


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Ganesh Chaturthi Special: विघ्नहर्ता हैं श्रीगणेश

Posted On: 7 Sep, 2013  
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Religious में

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कुछ अलग है ये दर्द….

Posted On: 4 Sep, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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हर चीज का बदलना तय है

Posted On: 24 Aug, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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मॉनसून में भी दिखें हॉट एंड हैपनिंग

Posted On: 22 Aug, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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शो-पीस बनना मेरी किस्मत नहीं !!

Posted On: 21 Aug, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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रिमझिम फुहारों के बीच खिला रहे चेहरा

Posted On: 19 Aug, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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दिल धड़काना तो कोई इनसे सीखे

Posted On: 19 Jun, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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खूबसूरत बालों वाली लड़की

Posted On: 11 Jun, 2013  
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मेट्रो लाइफ में

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आज समाज का चेहरा हर बदल चुका है पहले की तरह सयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवारों ने ले लिया है .उसी तरह पहले की तरह प्रत्येक परिवार में दो चार बच्चो के स्थान पर अब एक ,ज्यादा से ज्यादा दो बच्चे होते है ! अब बच्चे की मानसिकता अभिभावकों पर निर्भर करती है कि बच्चे को कितना समय दिया जाता है ! लेकिन बच्चे के दिमाग में बहुत सी बाते होती है जो वो हर बार माता पिता से शेयर नहीं कर सकता उसके लिए उसे किसी दोस्त की जरुरत होती है लेकिन कई बार कुछ बाते वो घर के बाहर के व्यक्ति से भी शेयर नहीं कर सकता ऐसे समय में शायद बहन या भाई से अच्छा कोई साथी नहीं हो सकता ! ऐसी स्थिति में बच्चा या अंतर्मुखी हो जायेगा और या ज्यादा सामाजिक !सामाजिक होना फिर ठीक है पर अंतर्मुखी होना कभी कभी घातक भी हो सकता है ! मेरा तो ये मानना है कि घर में कम से कम दो बच्चे होने चाहिए जिससे वे एक दुसरे को मानसिक संबलता प्रदान कर सके !दुसरे नज़रिए से देखा जाये तो आज के शिक्षा . और अन्य खर्चो को देखते हुए पति पत्नी दोनों नौकरी करना पसंद करते है ऐसे हालत में बच्चो की परवरिश एक समस्या से कम नहीं लगती ! ऐसे हालात में सामाजिक मजबूरी को देखते हुए एक ही संतान पर विराम लग जाता है ! एक संतान भी इसलिए कि समाज के तानो से बचा जा सके !

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