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सर्दियों में जब सांस लेना परेशानी बन जाए....

Posted On: 23 Jan, 2014 मेट्रो लाइफ में

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सर्दी के मौसम में थोडी-बहुत खांसी होना आम बात है, लेकिन दवा लेने के बावजूद लंबे समय तक इसका ठीक न होना चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि यह श्वसन-तंत्र से संबंधित बीमारी सीओपीडी  (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) का भी लक्षण हो सकता है।


breathing problemsक्या है समस्या

सीओपीडी  वास्तव में हमारे फेफडों और श्वसन-तंत्र से संबंधित समस्या है। जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में क्रॉनिक  ब्रोंकाइटिस  भी कहा जाता है। हमारे शरीर में फेफडे फिल्टर की तरह काम करते हैं। दरअसल इसमें छोटे-छोटे वायु-तंत्र होते हैं, जिन्हें एसिनस कहा जाता है। जब हम सांस लेते हैं तो फेफडे का यही हिस्सा शुद्ध ऑक्सीजन  को छान कर उसे हार्ट तक पहुंचाता है। फिर वहीं से ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह पूरे शरीर में होता है। इसके बाद बची हुई हवा को फेफडे दोबारा फिल्टर करके उसमें मौजूद नुकसानदेह तत्वों को सांस छोडने की प्रक्रिया के माध्यम से बाहर निकालते हैं। जब फेफडे के इस कार्य में बाधा पहुंचती है तो इससे सीओपीडी  की समस्या पैदा होती है।


प्रमुख लक्षण

सीढियां चढने के दौरान बहुत जल्दी सांस फूलना, खांसी के साथ कफ आना, छाती में जकडन  और घरघराहट की आवाज सुनाई देना, दवाएं लेने के बावजूद हफ्तों तक खांसी ठीक न होना आदि ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें कभी भी अनदेखा न करें।


क्यों होता है ऐसा

ज्यादा  स्मोकिंग करने वाले लोगों के फेफडों और सांस की नलियों  में नुकसानदेह केमिकल्स और गैस जमा हो जाते हैं। इससे सांस की नलिकाओं की भीतरी दीवारों में सूजन पैदा होती है। आमतौर पर सांस की ये नलिकाएं भीतर से हलकी गीली  होती हैं, लेकिन धुएं, धूल या हवा में मौजूद किसी अन्य प्रदूषण की वजह से श्वसन नलिकाओं के भीतर मौजृूद  यह तरल पदार्थ सूखकर गाढा और चिपचिपा बना जाता है। कई बार यह म्यूकस  सांस की नलियों  की अंदरूनी दीवारों में चिपक जाता है। इससे व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। बदलते मौसम में यह समस्या ज्यादा नजर आती है। चालीस वर्ष की उम्र के बाद लोगों में इस बीमारी की आशंका बढ जाती है क्योंकि उम्र बढने के साथ व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पडने लगती है।


कैसे करें बचाव

-नियमित चेकअप  कराएं और सभी दवाएं सही समय पर लें।

-सर्दियों में धूप निकलने के बाद मॉर्निग  वॉक  के लिए जाएं।

-स्मोकिंग से बिलकुल दूर रहें।

-आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स,  दही और फ्रिज में रखी चीजों से बचने की कोशिश करें। सर्दियों में गुनगुना पानी पीएं।

-दिन के वक्त खिडकियां खोलकर रखें, ताकि कमरे में ताजी हवा आ सके। तकियों की मदद से मरीज का सिरहाना थोडा ऊंचा रखें। इससे उसे सांस लेने में आसानी होगी।

-नियमित एक्सरसाइज और संतुलित खानपान से बढते वजन को नियंत्रित रखें। मोटापे की वजह से सांस की नलियांअवरुद्ध  हो जाती हैं। इससे व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन  का प्रवाह कम हो जाता है। ऐसे में सीओपीडी  के मरीजों की परेशानी और बढ जाती है।

-अगर इस समस्या के साथ व्यक्ति को डायबिटीज हो तो संयमित खानपान और दवाओं के सेवन से उसे शुगर का स्तर नियंत्रित रखना चाहिए।

- ज्यादा गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर की सलाह पर घर पर ही नेबुलाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन सिलिंडर या कंसंट्रेटर की व्यवस्था रखें। अगर पल्स ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन का सैचुरेशन 88 प्रतिशत से कम हो तो मरीज को ऑक्सीजन देने की जरूरत पडती है। परिवार का कोई भी सदस्य मरीज को आसानी से ऑक्सीजन दे सकता है।

-अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो सीओपीडी  से पीडित व्यक्ति भी सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है।


Web Title : breathing problem in winter season



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1 प्रतिक्रिया

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Kaed के द्वारा
June 9, 2016

 ( 2012.02.13 05:42 ) : My programmer is trying to convince me to move to .net from PHP. I have always disliked the idea because of the expenses. But he’s tryiong none the less. I’ve been using Movable-type on a number of websites for about a year and am nervous about switching to another platform. I have heard good things about blonnngige.eet. Is there a way I can import all my wordpress content into it? Any kind of help would be greatly appreciated!


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