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शादी के बाद सहेली की सीख भी काम नहीं आती

Posted On: 16 Nov, 2013 मेट्रो लाइफ में

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coupleसहेलियों की हिदायतें, मां की नसीहतें, इरॉटिका लिटरेचर, मिल्स एंड बून की रोमैंटिक  कहानियां, फिल्मों के परफेक्ट लव सींस,  वात्स्यायन  का कामसूत्र या फिर खजुराहो के भित्ति-चित्र….. शारीरिक संबंध से जुड़े ज्ञान देने के लिए दुनिया में यूं तो बहुत-कुछ है। मगर असल जिंदगी  में स्थितियां कई बार अलग होती हैं। रोमैंटिक, मधुर, रेशमी एहसास सा प्रेम हमेशा नहीं मिल पाता, क्योंकि हर विवाहित युगल का जीवन अलग होता है। उसकी चाहतें, कल्पनाएं, इच्छाएं और अभिव्यक्ति के तरीके अलग-अलग होते हैं।






भारतीय परंपरागत शादियों में नवविवाहित दंपती की स्थिति आज भी उस परीक्षार्थी जैसी है, जो काफी तैयारी करके परीक्षा-हॉल में जाता है, लेकिन वहां जाकर उसे लगता है कि वह तो सब भूल गया है। हालांकि इसके अपवादों से इंकार भी नहीं किया जा सकता। अव्वल लोग भी तो इसी दुनिया में हैं..।



बॉलिवुड की खूबसूरत दुल्हनें


शादी खुशियों के साथ ही बेचैनी, डर व घबराहट भी लाती है। दिल्ली स्थित रॉकलैंड  हॉस्पिटल  की स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ कंसल्टेंट  डॉ. मधु गोयल कहती हैं, शादी से पहले हर कपल को बेचैनी और परफॉर्मेस  की चिंता से गुजरना पडता है। खासतौर पर लडकियों के दिमाग  में कई बातें चलती हैं। जैसे साथी की अपेक्षाएं क्या होंगी, उसका स्वभाव व आदतें कैसी होंगी..। ऐसे में किसी करीबी विवाहित सहेली से बात करके वे अपनी दुविधा को कम कर सकती हैं। भावी पति से मिलने-जुलने, फोन करने, भविष्य की योजनाओं पर बात करने से उनकी झिझक कम हो सकती है। साथ ही शादी से पहले नियमित योग, ध्यान, सही खानपान और व्यायाम से उनका मन और शरीर नियंत्रित रह सकता है।


केमिकल्स का खेल

शादी का रोमैंटिक  खयाल डोपामाइन यानी फील गुड  हॉर्मोन को बढाता है। शारीरिक संबंधों से जुड़े चिकित्सीय एक्सप‌र्ट्स  मानते हैं कि यह हॉर्मोन  शादी के कुछ समय बाद तक भी बना रहता है। मगर जैसे ही कपल्स नॉर्मल जीवन में लौटते हैं और उनके बीच शारीरिक संबंध व्यवस्थित होने लगते हैं, डोपामाइन भी स्थिर हो जाता है। इसके बाद कपल्स के सामने अपने इंटीमेसी सेंस  को संतुलित बनाए रखने की चुनौती आती है। अस्थिरता, अनिश्चितता  और इरॉटिका  के बीच मन में प्रेम के एक सुरक्षित एहसास को बनाए रखना जरूरी  है। शारीरिक इंटीमेसी  शादी को मजबूत  बनाने में बडी भूमिका निभाती है। नवदंपती  के बीच शारीरिक संबंध बेहतर न हों तो इसका प्रभाव रिश्ते के अन्य पहलुओं पर भी पड सकता है। इसलिए नए जीवन का शुभारंभ करते हुए वास्तविक सेक्स संबंधी मुद्दों को समझें और अपने दांपत्य जीवन को बेहतर बनाएं।


खो गया वो बरेली का झुमका


मिसमैच  सेक्स ड्राइव

टेस्टोस्टेरॉन  हॉर्मोन  इच्छाएं जगाता है और यह शारीरिक संबंधों के प्रति इच्छा को ड्राइव के लिए ईधन है। माना जाता है कि लगभग दो-तिहाई स्त्रियों के दिमाग में शारीरिक संबंधों के जुड़ी इच्छाएं हमेशा नहीं जगतीं। जब तक पार्टनर ऐसी इच्छा न जाहिर  करे, वे इस बारे में नहीं सोचतीं। इसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लव लाइफ को गौण मान लें। शारीरिक संबंधों के प्रति इच्छाओं में यह अंतर रिश्ते में दूरी ला सकता है।


क्या करें

पुरुष के लिए जरूरी  है कि वह स्त्री के मन में रिश्ते के प्रति भरोसा जगाए। एक-दूसरे को स्पर्श करने, हाथ पकडने, गले लगाने, किस करने से शारीरिक क्रिया के लिए ऊर्जा मिलती है। ये छोटी-छोटी शारीरिक संबंधों से जुड़ी गतिविधियां सेक्स क्रिया को बेहतर बनाती हैं।


अपेक्षाओं में अंतर

दो व्यक्तियों की शारीरिक संबंधों से संबंधित अपेक्षाओं में फर्क हो सकता है। शादी के तुरंत बाद शारीरिक संबंध स्थापित करने की फ्रीक्वेंसी ज्यादा होती है। लेकिन हनीमून पीरियड खत्म होने के बाद व्यावहारिक जिम्मेदारियां भी आती हैं। यदि स्त्री खुद को शारीरिक इच्छाएं पूरी करने का जरिया मान ले और  पति की शारीरिक संबंधों के प्रति इच्छा को न समझ सके या स्त्री के मना करने पर पुरुष को लगे कि पत्नी उसकी उपेक्षा कर रही है तो इससे शादीशुदा जीवन में कुंठा पैदा हो सकती है।


क्या करें

दोनों पार्टनर्स एक-दूसरे की इच्छा का सम्मान करें। पुरुष पत्नी की जिम्मेदारियों  को समझे और अपनी आसक्ति  को प्रेम की ओर ले जाए। स्त्री भी सेक्स के महत्व को समझे क्योंकि इसके बिना रिश्ते बेहतर नहीं होंगे।


खुशी ऑर्गेज्म  से इतर भी

एक नई रिसर्च कहती है कि ऑर्गेज्म ब्रेन का वर्कआउट है। यह पजल या सुडोकू हल करने से भी बडी ब्रेन एक्सरसाइज है। मगर रीअल लाइफ में हमेशा ऑर्गेज्म की चाह चिढ पैदा कर सकती है। बिना चरम पर पहुंचे भी शारीरिक संबंध स्थापित करना खुशी देता है। पार्टनर को छूना, उसके शरीर को समझना भी लव लाइफ का हिस्सा है। शारीरिक संबंध स्थापित करना एक तरह से व्यायाम की तरह है। जैसे एक जैसी एक्सरसाइजेज बोर करती हैं, वैसे ही एक जैसी शारीरिक संबंध स्थापित करने वाली क्रियाएं भी नीरस लग सकती हैं।


क्या करें

शारीरिक संबंध  एक-दूसरे को खुशी देने का माध्यम है। शादी के शुरुआती दौर में परफेक्ट लव लाइफ की उम्मीद के बजाय एक-दूसरे के मन, शरीर व इच्छाओं को समझने का प्रयास करें। इसी से मैरेड लाइफ भी बेहतर होगी।


एसिड अटैक के बाद भी कम नहीं हुआ जज्बा


बेडरूम के बाहर

क्या फिजिकल  डिजायर्स  की अभिव्यक्ति ही संभोग है? व्यावहारिक स्थितियां कहती हैं कि  डोपामाइन  को हमेशा बनाए रखने के लिए बेडरूम के बाहर भी रोमैंस  की चाह को बरकरार रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना हैं कि शादी के पहले दो वर्षो में कपल्स  को एक-दूसरे के साथ कंफर्ट  लेवल बनाना पडता है और संबंध स्थापित करने का  स्टाइल बनाना होता है। समय के साथ-साथसंभोग करने की इच्छाओं में भी कमी आती है। प्यार के एहसास को सिर्फ शारीरिक संबंधों से  के इतर न जगाया जाए तो जीवन में खालीपन  बढ सकता है।


क्या करें इच्छा, ऊर्जा और जज्बे  को जाहिर करने का कोई निश्चित समय या जगह नहीं है। शोध बताते हैं कि जो कपल्स बेडरूम के बाहर एक-दूसरे का साथ पसंद करते हैं, उनके सेक्स जीवन में हमेशा स्पार्क बना रहता है। साथ-साथ किचन में काम करने, मूवी देखने, वॉक-एक्सरसाइज करने, शॉवर लेने..जैसी बातें दंपती को करीब लाती हैं।


फोरप्ले-आफ्टरप्ले

वरिष्ठ मनोचिकित्सक  डॉ. एस. सुदर्शनन  कहते हैं, संभोग से भी ज्यादा अहमियत फोरप्ले  की है। इससे पार्टनर के मन में इच्छाएं जगती हैं और उसे शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। लो-लिबिडो जैसी समस्या में भी इससे मदद मिलती है। इसी तरह आफ्टरप्ले  भी स्पेशल बॉण्डिंग पैदा करता है। इससे आत्मविश्वास और दूसरे के प्रति भरोसा जगता है।


क्या करें

संसर्ग एक ब्रेन गेम है। जब शरीर के खास  हिस्सों को छुआ जाता है तो मस्तिष्क तक भी यह संदेश पहुंचता है और दिमाग के तैयार होते ही शरीर रिस्पॉन्स करने लगता है। फोरप्ले एक नैचरल ल्युब्रिकेंट की तरह है। यह शारीरिक संबंध क्रिया को आनंददायक बनाता है, साथ ही उसे आसान व दर्द रहित भी बनाता है।


सेक्स को न बनाएं हथियार

पार्टनर पर गुस्सा  आए तो ड्राइंग रूम में जाकर सोफे पर सो जाना, साथी के नजदीक आते ही उसके सामने कोई मांग रख देना, घर वालों की शिकायतें करना या कोई जिद या मांग पूरी न होने पर संबंध स्थापित करने से इंकार करना.., ये हरकतें अपरिपक्वता  दर्शाती हैं। सेक्स जीवन के साथ-साथ दांपत्य पर भी इनका बुरा प्रभाव पडता है। शादी के शुरुआती दिन बेहद नाजुक होते हैं। इसलिए अपने संबंध को बार्गेनिंग चिप न बनाएं। अगर साथी से किसी बात पर नाराज  हैं तो उस मसले पर साफ-साफ बात करें। गुस्से में आकर अपनी मैरेड लाइफ बर्बाद न करें।



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