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जुनून ऐसा जिसने अलग कर गुजरने को मजबूर किया

Posted On: 28 Dec, 2012 मेट्रो लाइफ में

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woemn empowermentअगर आपके भीतर भी एंटरप्रेन्योरशिप की क्षमता है तो उसे पहचान कर, अपना कोई नया काम शुरू करें। इसमें युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। अपनी काबिलियत को पहचान कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना ही कामयाबी का सही  तरीका  है। यहा आप रूबरू होंगे कुछ ऐसे ही लोगों से जिन्होंने अपनी सफलता की राह खुद बनाई है!

पैसे नहीं पैशन से बात बनती है

साईरी चहल, सीईओ


जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशस में एम.फिल. करने के बाद कई जगहों पर जॉब किया, पर मजा नहीं आया। कुछ आउट ऑफ बॉक्स करने की चाहत ने इन्हें बिजनेस कंसल्टेंसी फर्म सायता की शुरुआत के लिए प्रेरित किया। उसके बाद की कहानी साईरी खुद बता रही हैं..


पढ़ाई के साथ-साथ मैं 1994 से ही छिटपुट काम कर रही थी। फिर 1996 से फुल टाइम जॉब करना शुरू किया। कुछ दिनों तक विज्ञापन से जुड़ी एक पत्रिका में काम किया, इसके बाद भी कई नौकरिया बदलीं। जब मुझे ऐसा लगा कि अपना काम शुरू करने के लिए अब मेरे पास पर्याप्त अनुभव हो गया है, तब मैंने अपनी सहेली अनीता वासुदेवा के साथ मिलकर 2006 में सायता की शुरुआत की। ऑफिस का सेटअप तैयार करने के लिए मैंने अपनी बचत से दो लाख रुपये खर्च किए थे। यह फर्म कंपनियों को उनके कामकाज और व्यवस्था से जुडे़ हर मुद्दे पर कंसल्टेंसी देने का काम करती है। यह काम इतना अच्छा चल निकला कि लगभग चार वर्षों में ही हमारा सालाना टर्नओवर लगभग ढाई करोड़ हो गया। संयोगवश शुरू से ही हमारी टीम में ज्यादातर स्त्रिया रही हैं। काम के दौरान हमने यह महसूस किया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से कई टैलेंटेड स्त्रियों को अपनी जॉब छोड़नी पड़ी। अगर एक बार स्त्रियों के कॅरियर में ब्रेक लग जाए तो उनके लिए दोबारा काम शुरू कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस पर हमने काफी रिसर्च किया। फिर पिछले साल फ्लेक्सीमॉम्स डॉट इन की शुरुआत की। यह स्त्रियों के लिए ऐसा जॉब पोर्टल है, जो उनके लिए काम की फ्लेक्सिबल स्थितिया उपलब्ध करवाता है। इसे शुरू करने के पीछे हमारा मकसद यही था कि जॉब मार्केट का 50 प्रतिशत टैलेंट परिस्थितियों की मजबूरी की वजह से सामने नहीं आ पा रहा, इससे केवल जॉब छोड़ने वाली स्त्रियों ही नहीं, बल्कि कंपनियों को भी नुकसान होता है।


हमारे इस प्रयास को कॉरपोरेट जगत में भी काफी अच्छा रेस्पास मिला। अब धीरे-धीरे कई बड़ी कंपनियों में स्त्रियों को घर से काम करने, सप्ताह में तीन दिन ऑफिस आने या रोजाना तीन-चार घटे के लिए ऑफिस आने की छूट देने का चलन बढ़ रहा है। हमारी यह कम्यूनिटी वेबसाइट बेहद यूजर फ्रेंडली और नि:शुल्क है। इसमें स्त्रियों को सिर्फ लॉग-इन करके ई-मेल आईडी सहित अपना रेच्यूमे अपलोड करना होता है। फिर उनके जॉब से संबंधित सारी जानकारिया अपने आप उन तक पहुंचती रहती हैं। इसके अलावा हमारी दूसरी स्कीम है- सेकंड चास बैक टु वर्क। इसके तहत अगर कोई स्त्री पर्सनली कोई कंसल्टेंसी या ट्रेनिंग लेना चाहती है तो इसके लिए उसे फीस देनी पड़ती है। हमारा मानना है कि अगर कोई स्त्री अपना कॅरियर फिर से संवारना चाहती है तो इसके लिए अपने ऊपर थोड़ा सा इन्वेस्ट करने में कोई हर्ज नहीं है। इसके तहत हम हर महीने लगभग 40 इवेंट्स आर्गेनाइज करते हैं, जिसमें स्त्रियों के लिए कॅरियर एडवाइजरी प्रोग्राम के अलावा हम उन्हें नए सिरे से रेच्यूमे बनाने और इंटरव्यू की तैयारी आदि की ट्रेनिंग देते हैं।

हम कंपनियों को भी बताते हैं कि वे अपने यहा स्त्रियों के लिए फ्लेक्सिबल माहौल कैसे तैयार करें। अब तक दो लाख से भी ज्यादा स्त्रिया हमारी इस वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर्ड कर चुकी हैं। हमारा यह काम भी अच्छा चल रहा है। मुझे ऐसा लगता है कि कुछ अलग कर दिखाने के लिए पैसों की नहीं, बल्कि पैशन की जरूरत होती है।


छोटी शुरुआत करें और रातों-रात सफलता की उम्मीद न रखें। शुरुआत में बाधाएं तो आएंगी ही। अगर कमर कसकर उनका मुकाबला करने को तैयार हैं, तभी इस दिशा में कदम बढ़ाएं। कोई भी काम शुरु करने के लिए पूंजी तो बहुत छोटा मुद्दा है। सबसे जरूरी है पैशन और कमिटमेंट।

टीमवर्क से मिली कामयाबी

इशिता स्वरूप, सीईओ

आईएमटी गाजियाबाद से एमबीए करने के बाद, कैंपस प्लेसमेंट के जरिये पहली जॉब कैडबरी कंपनी में मिली, पर इन्होंने नौकरी छोड़कर अपने काम की शुरुआत कैसे की, खुद बता रही हैं..


मुझे हरदम ऐसा लगता था कि मैं नौकरी के लिए बनी ही नहीं हूं। इसीलिए जॉब छोड़ने के बाद सहेली के साथ मिलकर 1995 में ओरियन डायलॉग नाम से एक डोमेस्टिक बीपीओ की शुरुआत की। इससे खास फायदा नहीं हो रहा था, लिहाजा काम बंद कर दिया। पापा-मम्मी बहुत नाराज हुए, पर मैंने हार नहीं मानी। काफी रिसर्च करने के बाद 2006 में हमने ऑनलाइन शॉपिंग 99 लेबल्स की शुरुआत की। हमने प्रमुख ब्रैंड्स से संपर्क करके कहा कि वे अपना एक्स्ट्रा स्टॉक हमें सस्ते में बेच दें। फिर उन चीजों की ऑनलाइन सेल लगाई। हम अपने कस्टमर का पूरा ख्याल रखते हैं और उन्हें कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा देते हैं। अब हमारे पास करीब 350 देशी-विदेशी ब्रैंड्स हैं। हम फ्लैश सेल भी लगाते हैं, जो एक-दो दिनों के लिए ही होता है। इससे हमें काफी फायदा होता है। मैं दूसरों द्वारा बनाए गए नियमों के तहत बंधकर काम करना पसंद नहीं करती। इस लिहाज से आज मैं अपने काम से बहुत खुश हूं और इसमें मेरी टीम का बहुत बड़ा योगदान है।

अपना काम शुरू करने के लिए दूरदर्शिता और स्पष्ट सोच का होना बहुत जरूरी है। क्रिएटिविटी, रिस्क उठाने का हौसला और लक्ष्य के प्रति लांग टर्म कमिटमेंट से ही कामयाबी हासिल होती है।


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