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क्या चाहता है आज का युवा !!

Posted On: 8 Aug, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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delhi youthफुल मस्ती-नो टेंशन, डांस-म्यूजिक, धूम-धडाका, गुल-गपाडा, बाइक राइड, फन पार्टी,फ्रेंड्स, लिव लाइफ किंग साइज, जियो और जीने दो, आजादी, बेबाकी मगर जिंदगी के प्रति संजीदगी भी..यही है आज का यूथ।

दिल्ली और आसपास के युवाओं से किए गए कुछ सीधे सवाल औरजवाब मिले दो-टूक।


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मस्ती की रेलगाडी

वर्ष 2007 में हुए एक ग्लोबल सर्वे में कहा गया था कि भारतीय युवा विश्व का सबसे खुशमिजाज युवा है। सखी के सीधे सवालों में भी यही बात सामने आई। युवा मस्ती की रेलगाडी पर सवार हैं। यह गाडी कभी-कभी करियर या रिश्तों के धुंध वाले स्टेशनों पर थोडा ठहर जाती है, लेकिन जल्दी ही फन-मस्ती की पटरी पर फिर दौडने लगती है। कूल ड्यूड युवाओं का प्रिय शब्द है। ये खुद को शांत, समझदार और मस्तमौला मानते हैं। कडी मेहनत के बाद मौज-मस्ती और पार्टी तो बनती ही है, यही मानना है युवाओं का।

मूल मंत्र : सैटरडे : पार्टी हार्डर, रेस्ट : वर्क हार्डर, संडे : स्लीप हार्डर


गैजेट्स का नशा

गैजेट्स इनकी कमजोरी हैं। इनकी उंगलियां सधे कलाकार की तरह सेलफोन के की-बोर्ड पर थिरकती रहती हैं। अपने प्रिय गैजेट्स से दूर होते हैं तो इन्हें बहुत गुस्सा आता है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल साइट्स से दूर रहना इन्हें अपने प्रिय से बिछडने जैसा लगता है। ज्यादातर युवाओं के लिए इंटरनेट, सेलफोन और सोशल साइट्स जरूरी हैं। 95 प्रतिशत ने माना कि सेलफोन, आइपॉड, लैपटॉप से उन्हें भावनात्मक संतुष्टि मिलती है। केवल 5 प्रतिशत ने माना कि गैजेट्स न होने से उन्हें फर्क नहीं पडता।


हर दोस्त जरूरी होता है

आज के यूथ के लिए रिश्तों की अहमियत नहीं, यह कहना शायद जल्दबाजी होगी। वे भी रिश्तों को महत्व देते हैं। लडकियों के लिए जहां माता-पिता पहले हैं, वहीं लडकों की जिंदगी में माता-पिता और फ्रेंड्स दोनों महत्वपूर्ण हैं। हर दोस्त जरूरी होता है.., मानते हैं लडके। कई बार ऐसा लगता है मानो वे पैसे के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन जब रिश्तों की बात आती है तो पैसा नंबर दो पर ही आता है। दोस्ती और संबंधों में वफा की तलाश उन्हें जरूर है। उनकी प्राथमिकता सूची में माता-पिता सबसे आगे हैं। 50 प्रतिशत के लिए माता-पिता पहली प्राथमिकता हैं, 45 प्रतिशत करियर और दोस्तों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं तो महज 5 प्रतिशत पैसे को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।


लव या टाइमपास

काफी प्रैक्टिकल है यह पीढी। प्यार एक सुविधा का नाम है, जब तक मिल सके-ठीक है, न मिले तो कोई गम नहीं। युवाओं के लिए प्यार क्षणिक आकर्षण, लगाव, दोस्ती का एक नाम है। वैसे प्यार के नाम पर ज्यादातर लडकों को कुछ कुछ नहीं होता, लेकिन लडकियों के लिए यह खास एहसास का प्रतीक है। 50 प्रतिशत लडकियां मानती हैं कि प्रेम भावनात्मक सुरक्षा देता है, 40 प्रतिशत इसे खास भावना का नाम देना चाहती हैं जबकि 10प्रतिशत इस पर कोई राय नहीं देतीं। 55 प्रतिशत लडके प्यार को टाइमपास, क्षणिक लगाव या टाइमवेस्ट कहते हैं, 20 प्रतिशत लव की एबीसीडी नहीं समझ पाते तो 20 प्रतिशत के लिए यह सब किताबी बातें हैं। 5 प्रतिशत इस कॉलम को ही ब्लैंक छोड देते हैं। हालांकि लव की इस मैथ्स में दोनों खासे उलझे नजर आते हैं। सेक्स को लेकर भी कभी हां-कभी ना जैसी स्थिति है। लडकियां बिना प्यार के सेक्स को नो कहती हैं, तो ज्यादातर लडके इसे बेसिक नीड मानते हैं। 60 प्रतिशत लडकियां सेक्स को प्यार व परस्पर भरोसे से उपजा संबंध मानती हैं तो 40 प्रतिशत इसे शादी के बाद ही सही मानती हैं। 60 प्रतिशत लडके इसे सहज इच्छा मानते हैं। 30 प्रतिशत इसे आजमाने की इच्छा रखते हैं तो 10 प्रतिशत शादी के बाद ही सेक्स को सही मानते हैं। ज्यादातर लडकियां प्री-मैरिटल सेक्स को गलत मानती हैं, तो ज्यादातर लडके इसे एक बार ट्राई जरूर करना चाहते हैं।


ब्ल्यू जींस का जवाब नहीं

स्टाइल में रहना यूथ को अच्छा लगता है। जींस-टी शर्ट है इनकी पहली पसंद। 100 प्रतिशत युवाओं के वॉर्डरोब में ब्ल्यू जींस है। 90 प्रतिशत लडकियों के वॉर्डरोब में डिजाइनर ड्रेसेज, एक्सेसरीज, फुटवेयर्स के कई पेयर्स, परफ्यूम, डिओ, स्टोल्स, जैकेट्स व स्वेटर हैं। जबकि सिर्फ 60्रप्रतिशत लडकों के वॉर्डरोब में पार्टी ड्रेसेज हैं। वैसे वॉर्डरोब के बारे में लडकियां ज्यादा सोचती हैं। जहां लडकों के वॉर्डरोब में जींस-टी शर्ट, डिओ, जैकेट्स-कोट के लिए ही जगह है, वहीं लडकियों के वॉर्डरोब में काफी कुछ है। यहां जींस के अलावा डिजाइनर टॉप्स, पार्टी ड्रेसेज, कुर्तियां, सलवार-सूट, एक्सेसरीज, परफ्यूम्स, जैकेट्स, पुलोवर, मैचिंग फुटवेयर और स्टोल्स भी हैं। फिर भी खास मौकों पर उनके पास ड्रेसेज की कमी ही रहती है।


काजल नया ब्यूटी स्टेटमेंट

काजल और आइलाइनर लडकियों का नया ब्यूटी स्टेटमेंट है। इनके भी कई शेड्स हैं उनके पास। वैसे उनके पर्स में हेयर ब्रश, पेट्रोलियम जैली, लिप बाम, लिप ग्लॉस, मॉयस्चराइजर और काजल जैसी चीजें हमेशा मौजूद रहती हैं। 85 प्रतिशत लडकियां पर्स में काजल व आइलाइनर जरूर रखती हैं, जबकि 80 प्रतिशत लडकों के वॉलेट में आई कार्ड, मेंबरशिप कार्ड या डेबिट का‌र्ड्स हैं। 15 प्रतिशत लडके ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आई.डी. जैसी चीजें रखते हैं तो 5 प्रतिशत के वॉलेट में फेमिली फोटोज भी हैं।


आजादी के नए मायने

आज के यूथ को आजादी चाहिए। आजादी पुराने विचारों और रूढियों से..। कोर्स, करियर, फ्रेंड्स, रिश्तेदार या जीवनसाथी चुनने और अपने ढंग से जीने की आजादी..। रोक-टोक और उपदेश उन्हें नहीं भाते। आजादी का अर्थ है किसी के प्रति जवाबदेही न होना और अपनी शर्तो पर जिंदगी जीना। लेकिन युवा स्वतंत्रता और उच्छृंखलता का अंतर भी खूब समझते हैं और अपनी आजादी को एक अनुशासन में रहते हुए एंजॉय करना चाहते हैं।


कट्रीना है नंबर वन चॉइस

कट्रीना कैफ हर युवा के दिल में बसी हैं। कैट की खूबसूरती और सादगी उन्हें प्रभावित करती है। 45 प्रतिशत ने कहा कि उनकी स्टाइल आइकॅन कट्रीना कैफ हैं। 30 प्रतिशत युवा प्रियंका चोपडा, करीना कपूर, सोनम कपूर, रणबीर कपूर, सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान के फैन हैं। 25 प्रतिशत ने हॉलीवुड कलाकारों को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा। ज्यादातर ने अपने फेसबुक अकाउंट में अपने प्रिय स्टाइल आइकॅन की फोटो लोड की है। लेकिन जब रोल मॉडल्स की बात आती है तो वे माता-पिता को प्राथमिकता देते हैं। 80 प्रतिशत युवा मानते हैं कि माता-पिता उनके रोल मॉडल हैं। 20 प्रतिशत के लिएभाई-बहन, संबंधी, शिक्षक या कोई महापुरुष उनके रोल मॉडल हैं।


सारे नियम तोड दो

यूथ अपने नियम खुद बनाना चाहते हैं। जिंदगी को जीने की उनकी अपनी शर्ते हैं। वे बंधे-बंधाए ढर्रे पर जीना पसंद नहीं करते। लकीर के फकीर नहीं बने रहना चाहते। वे चाहते हैं कि अपने नियम खुद बनाएं। लडकियां भी अब नियम तोडने में पीछे नहीं हैं। हालांकि ऐसा वे आमतौर पर नहीं करतीं, लेकिन उनके मन में इच्छा जरूर रहती है कि कभी वे भी कुछ नियम तोडें।

55 प्रतिशत युवा मानते हैं कि नियम तोडे जाने के लिए ही बने हैं, जबकि 45 प्रतिशत इनका पालन करना चाहते हैं। 55 प्रतिशत ने कभी न कभी कोई नियम जरूर तोडा है।


अरेंज्ड मैरिज है अच्छी

जीवनसाथी ढूंढने का काम माता-पिता पर ही छोडना पसंद करते हैं युवा। वे प्रेम विवाह तो करना चाहते हैं, लेकिन यह भी चाहते हैं कि लव मैरिज भी अरेंज्ड हो। ज्यादातर लडकियां मानती हैं कि माता-पिता पर उन्हें पूरा भरोसा है। वे जो भी फैसला लेंगे, वह ठीक होगा। 60 प्रतिशत युवा परंपरागत शादी करना चाहेंगे, 25 प्रतिशत लव कम अरेंज्ड मैरिज करना चाहेंगे, जबकि 15 प्रतिशत इंटरकास्ट मैरिज करना चाहते हैं। दिलचस्प यह है कि जहां लडकियां धूमधाम से शादी करना चाहती हैं, अधिकतर लडके कहते हैं कि शादी सिंपल होनी चाहिए। 65 प्रतिशत लडकियां शादी धूमधाम से करना चाहती हैं जबकि 35 प्रतिशत सादगी से विवाह करना चाहती हैं। 60 प्रतिशत लडके मानते हैं कि शादी सीधी-सादी होनी चाहिए। युवा प्यार और शादी को अलग-अलग करके देखना चाहते हैं। कहते हैं, यह जरूरी नहीं कि जिससे प्यार हो-उसी से शादी भी हो।


पार्टनर में वफादारी चाहिए

आज के युवा को करियर के बाद कोई और सवाल परेशान करता है तो वह है-पार्टनर की लॉयल्टी। संबंधों में कई बार वे असुरक्षित महसूस करते हैं। उनका मानना है कि पार्टनर को वफादार होना ही चाहिए। वैसे लडकियां हस्बैंड मटीरियल में लुक्स से ज्यादा सोशल बिहेवियर को प्राथमिकता देती हैं, जबकि लडकों के लिए आज भी ब्यूटी महत्वपूर्ण है। अगर पार्टनर में ब्यूटी के साथ ब्रेन भी मिल जाए तो सोने में सुहागा हो जाए। वैसे दोनों को ही जीवनसाथी से पूर्ण समर्पण चाहिए।


करियर वही जो मन भाए

करियर को लेकर आज के यूथ की सोच स्पष्ट है। आज भी इंजीनियरिंग, आई.टी.सेक्टर और बी.पी.ओ. उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं, लेकिन वे अपने लिए और भी रास्ते खुले रखना चाहते हैं। इंजीनियरिंग करते हुए एम.बी.ए. करने के बारे में सोचना उन्हें बुरा नहीं लगता। एक्स्ट्रा बेनिफिट उन्हें हर स्तर पर चाहिए। वैसे ज्यादातर युवा रचनात्मक काम करना चाहते हैं। उन्हें काम करने की आजादी चाहिए और हां- बेहतर कमाई वाली जॉब्स ही उन्हें भाती हैं। कुछ साल मेहनत और जिंदगी भर आराम.., यही सोचना है इनका। वे ऐसे करियर चाहते हैं, जिनमें ज्यादा पैसा, अधिक सुरक्षा, काम की गारंटी के साथ भरपूर प‌र्क्स भी मिलें।


जेनरेशन गैप तो रहेगा

युवा मानते हैं पुरानी और नई पीढी में बहुत फर्क है। एक ओर पुरानी पीढी के मूल्य, संस्कृति, रिश्तों में ठहराव, अनुशासन, सहयोग, अनुभव जैसे गुण उन्हें प्रभावित करते हैं, दूसरी ओर कई बार यही गुण उन्हें परेशान भी करते हैं। 80 प्रतिशत युवा मानते हैं कि पुरानी पीढी में अनुभव, प्यार, केयर, रिश्तों में कमिटमेंट और सांस्कृतिक-नैतिक मूल्य उन्हें आकर्षित करते हैं, जबकि 20 प्रतिशत को पुरानी पीढी में अनुशासन, सुरक्षा भावना और परंपराएं भाती हैं। युवा मानते हैं कि यदि पुरानी पीढी खुद को थोडा बदले तो जेनरेशन गैप कम हो सकता है। 70 प्रतिशत मानते हैं कि पुरानी पीढी उन्हें समझना नहीं चाहती और 30 प्रतिशत का कहना है कि पुरानी पीढी के लोग अपने जमाने का गुणगान ज्यादा करते हैं। उनके सकारात्मक और नकारात्मक पहलू के बारे में एक पंक्ति में वे कहना चाहते हैं-

प्लस पॉइंट : एक्सपीरियंस बोलता है।

माइनस पॉइंट : एक्सपीरियंस कुछ ज्यादा ही बोलता है।




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